Thursday, September 8, 2011

बिल से निकली बात


अनशन अन्ना ने किया और सेहत सरकार की खराब हो गयी , अन्ना ने तो सरकार की हालत सच में ऐसी कर दी जैसे किसी छोटे बच्चे ने सुबह सुबह खुद को बाथरूम में बंद कर लिया हो और बाहर इंतज़ार कर रहे अपने पिताजी से कह रहा हो की रिपोर्ट कार्ड पर साइन करो वरना दरवाज़ा नहीं खोलूँगा , और मनमोहन सिंह जी की हालत तो बिना ब्रेक की गाडी के उस ड्राइवर जैसी हो गयी है जो लगातार चलता तो जा रहा है मगर उसे ये नहीं मालूम की जाना कहाँ है | खैर राधा नाची तो सही मगर नौ मन तेल की बत्ती जलने बाद , यानी सरकार ने अंततः सिविल सोसाइटी द्वारा प्रस्तावित मांगो में से कुछ पर सहमती जाता दी  और जल्दी से जल्दी बिल को संसद में लाना चाहती है , सरकार शायद इस बात से डर रही है की कहीं स्विस बैंकों को भी लोकपाल के दायरे में लेन की मांग ना उठने लगे , और अगर ऐसा हो भी गया तो कोई बड़ी बात नहीं होगी क्योंकि जनता तो तब भी अन्ना का समर्थन इसी प्रकार करती ही रहेगी , बहरहाल हमे तो अन्ना की सेहत के लिए प्रार्थना के साथ भगवन से इस बात का भी शुक्र मानना चाहिए की एक बार भी ऐसा नहीं हुआ की अनशन पर बैठे अन्ना ने अपनी टीम के किसी सदस्य से बात करने के लिए फोन मिलाया हो और अगला केवल इसलिए बात नहीं कर पाया क्योंकि वो खाना खा रहा था |

वैसे शिवसेना की उस चिट्ठी जिसमे सिविल सोसाइटी के दूसरे सदस्यों को भी बारी बारी  अनशन पर बैठने की बात की गयी थी , उसमे दम हो या ना हो मगर यह बात तो तर्कसंगत व न्यायपूर्ण लगती है की भई ! खाने पीने का मौका तो सबको बराबरी से मिलना ही चाहिए (आशय केवल भोजन से है ) , वैसे जितना दम अन्ना में है लगभग उतनी ही ताकत ५-१० रूपए में बिकने वाली ' मैं अन्ना हूँ' लिखी टोपी में भी है , चाहे खुद पहन लो या दूसरों को पहना दो , और नहीं तो क्या ? एक बार १० रूपए का इन्वेस्टमेंट (भविष्य में होने वाले आन्दोलनों के लिए भी यह सुविधा उपलब्ध) और पूरे आन्दोलन काल में ना तो लोकल बस में टिकट लेने की चिंता नाहीं बिना हेलमेट बिना लाइसेंस और नाही तीन सवारी लिए तेज़ रफ़्तार बाइक पर पकडे जाने का डर , बशर्ते आपने उस टोपी को अपने सर पर बिठा रखा हो , क्या मजाल किसी ट्राफिक वाले की कि आपको टोक भी दे और कहीं गलती से रुकने का इशारा कर दिया तो मचा दो बवाल और बात का क्या है साहब ! मिनटों में रुख बदल लेगी कि और कोई रास्ता ना सूझा तो सरकार पुलिस के ज़रिये अन्ना समर्थकों को रोक कर अन्ना का समर्थन कम करना चाह रही है , और वैसे भी आजकल तो ट्राफिक वालों या पत्रकारों के किसी भी सवाल मसलन " लाइसेंस कहाँ है "? , हेलमेट क्यों नहीं पहना " ? , या " आप लोकपाल बिल के बारे में क्या जानते हैं "? का एक ही सही और असरदार जवाब है - "अन्ना हजारे जिंदाबाद " ! " भारत माता कि जय" ! " वन्दे मातरम् " ! और "इन्कलाब जिंदाबाद " , प्रश्नकर्ता के सारे सवाल धरे के धरे रह जायेंगे और आप सीना चौड़ा कर के अपने रस्ते जा सकेंगे|

 खैर , जनलोकपाल बिल तो आएगा ही साथ ही एक अच्छी बात ये भी हो गयी कि उन स्टुडेंट्स और वैसे लोगों ने भी नित्य रामलीला मैदान में जाकर , शहर भर में भारत का झंडा थामे गाड़ियों से चक्कर काट काट कर , चेहरे पर रंग रोगन करवा कर और भी भिन्न तरीकों से इस आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले कर प्रायश्चित कर लिया जिन्होंने स्वयं कभी डोनेशन से दाखिला लिया होगा या बगैर वैधानिक प्रक्रिया के गाड़ी चलाने का लाइसेंस लिया होगा , या हो सकता है कि मैं गलत हूँ और ये सब भ्रष्टाचार के तहत ना आता हो , यदि मैं गलत हूँ तो सबसे माफ़ी और भगवान् से सदबुद्धि चाहूँगा साथ ही ईश्वर करे कि भ्रष्टाचारियों के नाक में नकेल कसने वाला जन लोकपाल  बिल जल्दी से जल्दी कानून बन जाये और देश से भ्रष्टाचार का सफाया "हेड एंड शोल्डर्स" से "डैनड्रफ" की तरह हो जाये , पर एक बात मुझे सता रही है कि लोकपाल आने के बाद यदि किसी फ़ोकट बाबू से किसी दफ्तर का चपरासी किसी काम के ५० रूपए मांगता है फ़ोकट बाबू दे देते हैं काम हो जाता है बात दोनों के बीच दफ़न हो जाती है और फ़ोकट बाबू अपने घर चले जाते हैं तो इस भ्रष्टाचार पर लोकपाल जी क्या एक्शन लेंगे इसका कहीं कोई ज़िक्र पूरे मसौदे में मुझे तो नहीं मिला , बहरहाल ईश्वर से प्रार्थना कि अन्ना स्वस्थ रहें , जनलोकपाल बिल जल्दी पास हो, भ्रष्टाचार मिटे और जनता खुशहाल हो |

अन्ना जी जिंदाबाद, अरविन्द केजरीवाल जी जिंदाबाद ,किरण बेदी जी जिंदाबाद ,प्रशांत भूषण जी  जिंदाबाद, शांति भूषण जी जिंदाबाद और कहीं कोई रह ना जाये अतः सारे समर्थक जिंदाबाद | "जय हिंद" !               

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