Tuesday, July 3, 2012

एक मनोवैज्ञानिक अभियान

 दोस्तों , कुछ दिनों पहले संयोगवश मेरी मुलाक़ात चिकित्सा वैज्ञानिक श्री सुबोध कुमार से हुई ,इस विषय में मेरी रूचि भी है अतः बात चीत का सिलसिला चल पड़ा , बात चीत के दौरान उन्होंने एक केस की चर्चा की जिसे सुनने के बाद मुझे लगा की ऐसी बातें तो अक्सर exams के results आने के बाद हमें सुनने को मिलती हैं , तो मैंने आप सब के साथ इसे बांटने के बारे सोचा| उन्होंने बताया की एक लड़की ने शायद आत्महत्या की कोशिश की थी , वजह थी परीक्षा में कम नंबर , मुझे ठीक से याद तो नहीं पर शायद उसके 56 % नंबर आये थे, वो बहुत दुखी थी , जब सुबोध जी ने उससे पूछा की वो कितना expect कर रही थी तो शायद उसने कहा कम से कम 85% , तो ये जांचने के लिए की वाकई जितना वो चाह रही थी उतने नंबर उसे आ सकते थे सुबोध जी ने उससे एक बड़ा हल्का सा गणित का प्रश्न पूछा की यदि 435 को 100 से भाग दिया जाये तो उत्तर क्या होगा ...... और जैसा सुबोध जी ने बताया की उस लड़की को 7 मिनट लगे इसका हल निकालने में और फिर भी वो सही जवाब नही दे सकी ... वो लड़की depression में थी .... और बिना किसी दवाई के मनोवैज्ञानिक इलाज से वो बिलकुल ठीक हो गयी| मुझे ये बात जान कर बहुत ख़ुशी हुई की इस तरह के और भी बहुत से प्रोब्लम्स का सामना कर रहे स्टुडेंट्स,कामकाजी लोग और रिटायर्ड लोगों के लिए सुबोध जी ने निजी तौर पर एक हेल्पलाइन चला रखी है, जो की उनका अपना निजी मोबाईल नंबर है साथ ही अपने स्तर से उन्होंने एक अभियान भी छेड़ रखा है जिसमे वो व्यवहार या आदतों से होने वाली समस्या , उदासी या अकेलापन , किसी भी किस्म का तनाव या depression , परिवार के सदस्यों की समस्या और इस तरह की कई और समस्याओं का समाधान बताते हैं .....मुझे ये बताते हुए ख़ुशी हो रही है की अब मैं भी अपने स्तर से उनके इस अभियान से जुड़ गया हूँ .... आप सब का साथ और समर्थन चाहिए ताकि बिना दवाई के ठीक हो जाने वाली बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो सके जो जानकारी या इच्छाशक्ति की कमी के कारण बाद में गंभीर रूप धारण कर लेती है ......इन मुद्दों पर अधिक जानकारी के लिए आप मुझसे संपर्क कर सकते हैं |

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